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Chinti aur Haathi

Chinti aur Haathi | चींटी और हाथी

कहानी 'चींटी और हाथी'

एक जंगल में बहुत सारी चींटियाँ और हाथी रहते थे, चीटियों की एक रानी थी जो बहुत ही समझदार थी जिस कारण सभी चींटियाँ उस रानी चींटी की बात को नहीं टालती थी व उसके कहें अनुसार ही सब कार्य किया करतीं थीं।

वह रानी चींटी भी बहुत ही मिलनसार थी तथा अपने द्वारा लिए गए सभी फैसलों को बहुत ही सोच विचारकर लिया करती थी, रानी चींटी ने सभी चीटियों को एक पेड़ के नीचे अपना नया घर बनाने का आदेश दिया था जिसे सभी चींटियाँ बहुत ही मन से मान रहीं थी और पूरी लगन से उस कार्य में जुटीं हुई थीं।

उस जंगल मे एक हाथी भी रहता था जिसका नाम मुन्नू था, वह हाथी बहुत ही घमंडी था जिससे उसके संपर्क में आने वाले सभी जानवर बड़े परेशान रहते थे। मुन्नू हरदम अपने घमंड में चूर रहता था तथा सभी जंगली जानवरो के साथ मस्ती करता रहता था, वह उनको तरह तरह से परेशान भी किया करता था जिससे सभी दुखी आ चुके थे।

उधर जब चींटियो का नया घर पूरी तरह से बन कर तैयार हो गया तो चीटियों ने अपना भोजन भी उस घर में जमा करना शुरू कर दिया, यह सब कुछ बड़ी देर से वह मुन्नू हाथी देख रहा था और तभी उसे अपने बुरे स्वभाव के कारण उन्हें परेशान करने की सूझी। वह उनके पास आकर चीटियों से कहने लगा “तुम सब इतनी मेहनत क्यों कर रही हो, मैं चाहूँ तो तुम्हारा यह नया घर एक पल मे ही तोड़ सकता हूँ“।

चींटियों ने मुन्नू की बातों पर ज्यादा ध्यान ना देते हुए अपना काम जारी रखा जिससे मुन्नू का घमंड जाग उठा और वह गुस्से में आग बबूला होकर तालाब की तरफ चल दिया, वह घमंड में चूर होकर अपनी सूंड में पानी भरने लगा और फिर उसने आधा पानी पीकर बचा हुआ पानी चीटियों के घर पर डाल दिया।

मुन्नू की इस हरकत को रानी चींटी देख रही थी, वह मुन्नू हाथी से कहने लगी “हमने यह नया घर बहुत ही मेहनत व लगन से बनाया है। हम इस घर को बहुत दिनों से बना रहे है इसे मत तोड़ो, मैं तुमसे विनती करती हूँ”। इस पर हाथी कहने लगा “मैं जो चाहूँ वह कर सकता हूँ, तुम मुझे उपदेश देने की कोई भी कोशिश ना करो तो ही यह तुम्हारे लिए अच्छा रहेगा“, इतना कहकर वह अपने पैर पटकता हुआ वहां से चला गया।

इस तरह समय गुजरता गया और फिर कुछ दिनों के बाद जंगल में शिकारी आये और उन्होंने बड़ी चालाकी से घेरकर मुन्नू हाथी को पकड़ लिया, जब मुन्नू शिकारियों के जाल में फँसा हुआ जोर जोर से चिल्ला रहा था तो रानी चींटी ने सोचा मुझे इस हाथी की मदद करनी चाहिए।

यह सोच कर रानी चींटी मुन्नू हाथी के जाल के पास जा कर उससे बोली “मुन्नू राजा आप परेशान न हो, यहीं पास में मेरा एक दोस्त रहता है शम्भू चूहा। मैं अभी जाकर उसे बुला लाती हूँ और उससे तुम्हारी मदद करने के लिए प्रार्थना करती हूँ, मुझे पूर्ण विश्वास है कि मेरा मित्र मेरी बात मानेगा और इस मुसीबत की घड़ी में आपनी मदद ज़रूर करेगा, तुम चिंता मत करो परेशान मत हो”।

रानी चींटी की इन सब बातों को सुन कर मुन्नू हाथी मन ही मन बहुत शर्मिन्दा था, उसे चींटियों के साथ अपने द्वारा किये गए बर्ताव पर बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी और वह सोच रहा था की मैं इतना बड़ा व ताक़तवर होने के बावजूद भी कभी किसी के काम नहीं आ सका लेकिन यह छोटी सी चींटी कितनी मददगार व सरल है।

उधर दूसरी तरफ रानी चींटी अपने मित्र शम्भू चूहे के पास जा पहुची और उससे कहने लगी “मित्र शम्भू मेरा एक दोस्त है मुन्नू हाथी, इस वक्त वह बहुत बड़ी मुसीबत में है और तुम ही उसे इस मुसीबत से निकाल सकते हो। मैं तुमसे प्रार्थना करती हूँ मेरे मित्र, तुम्हे मुन्नू की मदद करनी होगी”, इस पर शम्भू बोला “चींटी बहन मैं तुम्हारे उस मित्र की मदद ज़रूर करुगा पर बताओ तो सही बहिन आखिर हुआ क्या है”।

रानी चींटी राहत की साँस लेते हुए कहती है “शम्भू भाई हुआ यूँ की हमारे जंगल में आज दो शिकारी घूम रहे थे जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए और बदकिस्मती से मुन्नू हाथी उनके जाल में फँस गया है। वह बहुत ही परेशान है, मैंने उसको समझाया कि मुन्नू परेशान मत हो मेरा दोस्त शम्भू तुम्हे इस कैद से आजाद ज़रूर करेगा और मैं बस यह कहती हुए सीधा तुम्हारे पास चली आयी। अब तुम बस जल्दी चलो और मुन्नू हाथी को उन शिकारियों के आने से पहले उस जाल से आजाद कर दो”।

यह सब सुन शम्भू चूहा जल्दी से रानी चींटी के साथ मुन्नू हाथी के पास गया जहाँ शिकारियों ने उसे जाल में बाँधा हुआ था और फिर देखते ही देखते शम्भू चूहे ने सारा जाल काट दिया, जाल के कटते ही वह तीनों उन शिकारियों के आने से पहले वह से वहां से दूर भाग गए।

इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि कैसे एक छोटी सी चींटी भी मुसीबत के समय इतने बड़े हाथी के काम आयी इसलिए हमें कभी भी यह नहीं सोचना चाहिए की हम ही सबसे बड़े व शक्तिशाली है, जीवन में किस समय हमें किस की ज़रूरत पड़ जाये यह कोई नहीं जनता।