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Wafadaar Baagh

Wafadaar Baagh | वफ़ादार बाघ

कहानी 'वफ़ादार बाघ'

कमल अपने बच्चे और अपनी पत्नी माला के साथ गांव से बहुत दूर और जंगल के बीच बड़े ही प्यार से रहा करते थे। वे अक्सर अपना पेट पालने के लिए गांव में मजदूरी करने आया करते थे और फिर शाम होने पर अपने घर लौट जाया करते थे।

कमल अपना जीवन बड़े प्रेम और संतोष से व्यतीत कर रहे थे। एक दिन अधिक काम होने के कारण कमल और माला गांव में बहुत देर तक खेत में काम कर रहे थे, वे दोनों ही बहुत मेहनती थे तथा अपना काम बहुत ही ध्यान और लगन से किया करते थे।

शाम होने पर उन्होंने खेत के मालिक से अपने कार्य करने के पैसे लिए और जल्दी से अपने घर की तरफ कदम बनाने लगे, उनका घर गांव से काफी दूर जंगल के बीचो बीच था और शाम का अंधेरा गिरता जा रहा था इसलिए बहुत तेजी से अपने कदम बढ़ाते हुए चल रहे थे।

जब वे जंगल के अंदर कुछ दूर तक पहुंचे तभी उन्हें किसी जानवर के बच्चें के रोने की आवाज सुनाई दी, उन्होंने बड़े ध्यान पूर्वक सुना की आवाज कहां से आ रही है।

कुछ दूरी पर जब उन्होंने झाड़ियों के पीछे जाकर देखा तो वहां एक बाघ का छोटा सा बच्चा रोता हुआ दिखा जिसे देखकर उन्होंने अंदाजा लगाया कि शायद किसी शिकारी ने बाघ का शिकार कर दिया है और उसी बाघ का यह बच्चा रोता बिलखता हुआ जंगल में छूट गया है।

वह सोचने लगे कि अगर यह बच्चा यहां रहा तो अन्य जंगली जानवर मिलकर उसे मार देंगे और खा जाएंगे, पर कुछ सोचकर माला ने कमल से कहा ‘क्या एक बाघ के बच्चे को अपने साथ घर ले जाना खतरे का काम नहीं होगा’।

इस पर कमल ने बड़े ही धैर्य से उससे कहा ‘यह तो मुझे पता नहीं, परंतु इस मुश्किल के समय बाघ के इस छोटे से बच्चे को हमारी सुरक्षा की जरूरत है तो इसलिए हमें उसकी मदद करनी ही चाहिए’, और ऐसा कहते हुए कमल उसे अपने साथ अपने घर ले आया

माला ने उस बाघ के बच्चे को थोड़ा सा गर्म दूध पिलाया और बड़े प्यार से उसका नाम ‘राजा’ रखा। कमल और उसकी पत्नी माला काफी खुश रहने लगे क्योंकि अब घर पर राजा रोज उनकी राह देखता था।

जब वह शाम को काम करके जंगल में अपने घर वापस आते थे तो राजा बहुत खुश होता था और उनके साथ खूब उछल-कूद करता था जिससे वह दोनों भी खुश होते थे।

ऐसे ही काफी समय बीतता रहा और बाघ का वह छोटा सा बच्चा राजा धीरे-धीरे बड़ा होने लगा, इसी बीच माला ने भी एक बालक को जन्म दिया इसलिए अब माला घर पर ही रहकर अपने बालक का ख्याल रखती थी।

घर और बच्चे की ज़िम्मेदारी बढ़ने के कारण कमल अब ज्यादा समय खेतों पर काम करने के उपरांत रात तक ही वापस घर आ पाता था।

उन दोनों का बालक अब साल भर का हो गया था और धीरे-धीरे चलने लगा था, कमल साथ काम करने वाले अपने दोस्तों को बता रहा था ‘मेरा बालक अब साल भर का हो गया है और चलने भी लगा है’।

यह सुनकर उसके दोस्तों ने हैरानी से उससे पूछा ‘तुम्हारा घर जंगल के बीचो बीच है, क्या माला को जंगल में रहने में डर नहीं लगता’।

इस पर कमल उन्हें समझाते हुए कहने लगा ‘मैं उसको घर में अकेला छोड़कर नहीं आता, उसकी रक्षा के लिए राजा है ना मेरा शेर जिसे मैंने बचपन से पाला है और अब वह मेरी पत्नी माला और बच्चे की रखवाली भी करता है’।

उसके दोस्त उसकी यह बात सुनकर और ज्यादा हैरान और परेशान होकर उससे कहने लगे ‘तुम बहुत सावधान रहना जंगली जानवर का कोई भरोसा नहीं होता’, उस दिन कमल को घर लौटने में काफी देर हो गई।

इस पर माला काफी घबरा गई और जब उससे ना रहा गया तब वह अपने बच्चे को राजा के भरोसे घर पर छोड़ कर कमल की जा तलाश में जंगल से निकल पड़ी, थोड़ी दूर चलने पर उसे कमल के कदमों की आवाज आई जिसे सुनकर माला की जान में जान आई।

अब दोनों बहुत तेज चाल से घर की तरफ वापस लौट रहे थे, तभी घर के बाहर पहुंचने पर कमल और माला के होश उड़ गए जब उन्होंने राजा को बाहर खड़ा पाया और उसके पर खून लगा देखा

यह देख कर वह दोनों बहुत विचलित हो उठे और उन्होंने सोचा राजा ने हमारे बच्चे को खा लिया है या मार डाला है।

दिमाग में इस बात का ख्याल आते ही कमल को बहुत ज्यादा क्रोध आया और उसने अपनी कमर में बंधी कटार से राजा पर प्रहार कर दिया जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया और तभी दोनों भागे-भागे घर के अंदर पहुचे।

अंदर जाकर उन्होंने देखा कि उनका बच्चा बड़े आराम से खेल रहा था तथा आंगन में एक बहुत बड़ा सांप मरा हुआ पड़ा था, यह सब नजारा देखकर उन दोनों को सब कुछ समझ आ चुका था।

अब उन्हें राजा के साथ किये गए अपने बर्ताव का ध्यान आया और उनका मन दुख से भर उठा कि हाय यह हमने उसके साथ क्या कर दिया। दोनों बिना कोई पल गवाएँ बाहर की और दौड़ पड़े, लेकिन बाहर आकर जब उन्होंने राजा को देखा तब तक वह निर्दोष मर चुका था

वह दोनों बहुत जोर – जोर से रोने लगे और अपने द्वारा किये गए कर्म पर पश्चाताप करने लगे, वे दोनों बार – बार यही कह रहे थे कि हमारे बच्चे की जान बचाने के लिए राजा ने अपनी बहादुरी का परिचय जानवर होते हुए भी दिया लेकिन बेचारा हमारी मुर्खता के कारण इस संसार से चला गया

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कोई भी काम या निर्णय बड़ी सोच समझकर उठाना चाहिए, क्रोध के आवेश में आकर कोई भी काम हमें कितना भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है और उसके बाद हमारे पास पछताने के सिवाय और कुछ भी नहीं बचता।