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Corona Virus aur Becteria

Corona Virus Aur Bacteria | कोरोना वायरस और बैक्टीरिया

कहानी 'कोरोना वायरस और बैक्टीरिया'

एक समय की बात है, बैक्टीरिया और वायरस बहुत अच्छे दोस्त थे, वे दोनों साथ-साथ में उड़ते और खेलते थे तथा बहुत खुश रहते थे।

एक दिन उन दोनों ने आपस में निश्चय किया कि हम दोनों दोस्त हमेशा साथ साथ ही रहेंगे ‘हा हा हा !!! हम दोनों हमेशा ऐसे ही साथ साथ रहेंगे’।

वायरस ने बैक्टीरिया से कहा ‘दोस्त अब मुझे अपने बारे में कुछ बताओ कि तुम आखिर क्या क्या कर सकते हो’, अपने दोस्त की यह बात सुनकर बैक्टीरिया खुश होते हुए बोला ‘ओहो यह तो बहुत अच्छा है प्रश्न है, मैं जो कुछ भी कर सकता हूं वह सब तुम्हें बताता हूं और समझाता भी हूं’।

बैक्टीरिया बोला ‘मैं खाने-पीने की चीजों में घुसकर उनको खराब कर देता हूं जिससे उन में बदबू आने लगती है, इस वजह से सब उन्हें खाने से डरते हैं और उन्हें कोई नहीं खाता। अगर गलती से कोई खा भी ले तो में उन्हें बीमार कर सकता हूँ’। 

वायरस ने उससे पूछा ‘अच्छा बस इतना ही, तुम बस उनका खाना-पीना खराब कर सकते हो और उन्हें उसे खाने से रोक सकते हो, अब मेरी सुनो कि मैं क्या क्या कर सकता हूं’।

वायरस आगे बोला ‘मैं तो हवा से या छूने भर से ही सीधा मनुष्यों के शरीर में प्रवेश कर उनको बीमार बना सकता हूं और उन्हें मार भी सकता हूं, इतना ताकतवर हूँ मैं’।

वह बोला ‘आजकल तो मैं और भी ज्यादा ताकतवर हो गया हूँ और कोरोना वायरस के रूप में सारे संसार में फैल रहा हूँ, पूरी दुनिया मेरे डर से काँप रही है’। 

वायरस की यह बात सुनकर बैक्टीरिया थोड़ा डर गया और हैरान होकर बोला ‘अच्छा क्या सच में तुम मनुष्य को मार सकते हो और तुम्हें कोई रोक भी नहीं सकता’।

उसकी यह बात सुनकर कोरोना वायरस खुश होता हुआ बोला ‘हा हा हा !!! अभी तुम्हें मेरी ताकत का अंदाजा ही कहां है इसलिए तुम्हें विश्वास करने में थोड़ा सा समय लग रहा है, चलो मैं तुम्हें अपनी ताकत दिखाता हूं चलो तुम मेरे साथ चलो मैं तुम्हें दिखाता हूं कि मैं कैसे अपनी ताकत का इस्तेमाल करता हूं’।

‘तुम मेरे साथ साथ रहकर देखना कि मैं मनुष्यों को कैसे परेशान और बीमार करता हूं, फिर वह कैसे  मेरे प्रभाव के आगे घुटने टेकते हैं और आखिर में कैसे तड़प तड़प कर अपने प्राण त्यागते हैं’।

बैक्टीरिया उसकी बात मान जाता है और वह दोनों साथ-साथ घूमते हुए एक जगह पहुचते है जहां एक रोहित नाम का व्यक्ति कुछ लोगो के साथ खड़ा होता है, तभी उसके पास वाला व्यक्ति थोड़ी तेज खांसता है

यह देखकर वायरस खुश होता हुआ अपने दोस्त बैक्टीरिया से कहता है ‘वह देखो उस व्यक्ति को, अभी – अभी उसके पास वाले व्यक्ति ने अपनी खाँसी से मेरे कुछ कण हवा में छोड़े है। अब तुम मेरे कोरोना रूप का कमाल देखो’।

यह कहकर वह वायरस उस रोहित नाम के सख्श के आसपास मौजूद कणों में मिलकर उसके शरीर में पहुंच जाता है और वहां बड़ी ही तेजी के साथ बहुत सारे वायरस में बदलकर उसके शरीर में फ़ैलने लगता है

कुछ ही समय के बाद रोहित के शरीर पर वायरस का असर दिखना शुरू हो जाता है और उसको खांसी और बुखार होने लगता है, लेकिन वह उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देता।

रोहित सोचता है यह एक साधारण बुखार है जो दवाई लेकर ठीक हो जाएगा और वह सुबह एक साधारण सी गोली लेकर अपने ऑफिस चला जाता है, कुछ समय बाद उसकी हालत देखकर उसका साथी अशोक उससे कहता है ‘रोहित आज मुझे तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं लग रही है’।

लेकिन अशोक की यह बात सुनकर रोहित बोलता है ‘यार कल रात से मुझे थोड़ा बुखार और खाँसी है, मैंने दवाई ले ली है, कुछ देर में आराम आ जायेगा’ और यह कहकर वह वापस अपने काम में लग जाता है।

रोहित के बार – बार खांसने की वजह से कोरोना वायरस के कीटाणु उसके आस – पास फ़ैलने लगते है जिससे उसके साथियों पर भी वायरस के सूक्ष्म कण पहुँच जाते है और उनके शरीर में भी अपना प्रभाव दिखाने का मौका ढूंढने लगते है।

कुछ घंटे और बीत जाने पर जब रोहित की तबीयत सुधारने के बजाय और बिगड़ने लगती है तब उसके सभी साथी मिलकर उससे बोलते है ‘तुम्हारी तबीयत अब और ज्यादा खराब लग रही है हमारी बात मान कर तुम्हें यहीं पास के अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए’।

अपनी बिगड़ी तबीयत को देखकर और अपने दोस्तों की बात मानकर रोहित पास ही के अस्पताल में अपना चेकअप कराने जाता है, वहीं दूसरी तरफ ऑफिस के बाकी दोस्तों को भी बुखार और खांसी के हलके लक्षण नजर आने लगते हैं।

कुछ समय बाद रोहित का दोस्त अशोक  सोचता है कि अभी तक रोहित वापस क्यों नहीं आया तो उसे कुछ आशंका होती है, कुछ देर और इंतज़ार करने के बाद वह खुद ही पास के अस्पताल में जाकर उसके वहां आने के बारे में पूछता है।

अस्पताल में रोहित के बारे में पूछते ही सभी लोग बड़े सावधान हो जाते हैं और उसे रोहित के बारे में सारी जानकारी देने लगते हैं तभी उसे पता चलता है कि रोहित को कोई साधारण खांसी या बुखार नहीं बल्कि कोरोनावायरस का संक्रमण हुआ है

इसी संक्रमण के कारण उसकी तबीयत इतनी खराब है तथा उसे यह भी पता चलता है कि इस कोरोना वायरस संक्रमण की अभी तक कोई दवा पूरी दुनिया में उपलब्ध नहीं है और यह संक्रमण खांसने या छींकने से पास के लोगों को भी संक्रमित कर देता है

इस बात का पता चलते ही रोहित का दोस्त अशोक वहां मौजूद डॉक्टर से कहता है ‘डॉक्टर साहब हमें भी बड़ा डर लग रहा है क्योंकि रोहित से मिलने के बाद मुझे और ऑफिस के कुछ और दोस्तों को भी अपनी तबीयत सही नहीं लग रही है’।

अशोक की यह बात सुनकर डॉक्टर तुरंत ही उसका और उसके साथियों का चेकअप करते हैं जिसमें पता चलता है कि उसके साथ साथ ऑफिस के बाकी लोगों को भी कोरोना वायरस का संक्रमण हो चुका है, अगले कुछ ही घंटों में उन सभी लोगों को आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट करा दिया जाता है

यह सब कुछ देख कर वायरस बहुत खुश होता है और अपने साथ घूम रहे दोस्त बैक्टीरिया से कहता है ‘देखा तुमने मनुष्यों पर मेरा असर !!! अब तो तुम्हें पता चल गया होगा कि मैं कितना शक्तिशाली हूं’।

वायरस की यह बात सुनकर बैक्टीरिया थोड़ा दुखी होकर उससे कहता है ‘हां दोस्त, मैंने देखा पर इससे तुम इतना खुश मत हो क्योंकि बुरे काम का नतीजा भी बुरा ही होता है, अगर तुम अपने इस रूप से इन्हें इतना सताओगे तो देखना एक दिन यह मनुष्य तुम्हें भी खत्म कर देंगे’।

बैक्टीरिया की यह बात सुनकर वायरस अकड़कर उससे कहता है ‘हा हा हा !!! लगता है तुम्हें मुझसे जलन हो रही है तभी तुम ऐसा बोल रहे हो क्योंकि मैं तुमसे कहीं ज्यादा ताकतवर और खतरनाक हूँ’, और यह कहकर कोरोनावायरस बड़े जोर जोर से हंसने लगता है।

अपने दोस्त कोरोनावायरस की ऐसी सोच और व्यवहार को देखकर बैक्टीरिया बड़ा दुखी होता है और उससे नाराज होकर अपनी दोस्ती तोड़ कर वहां से चला जाता है

कुछ ही दिनों में अस्पतालों में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ने लगती है, यह कोरोनावायरस सभी जगह ना फैले उसके लिए सभी डाक्टर और साइंटिस्ट मिलकर सलाह करते है

मास्क का पहनना, आपस में उचित दूरी बनाए रखना, हाथों का सैनिटाइज करना और घर से बाहर ना निकलना ही सबसे अच्छे उपाय हैं यह जानकर वे सब सरकार को बता देते हैं जिससे सरकार यह सभी नियम पूरे देश में लागू कर देती हैं ताकि संक्रमण ज्यादा ना फैल पाए।

सभी तरफ नियमों का प्रचार प्रसार होने पर लोग घरों से निकलना कम कर देते हैं, घर का ही बना खाना खाने लगते हैं, सफाई का पूरा ख्याल रखते हैं, एक दूसरे से उचित दूरी बनाकर ही मिलते हैं जिससे यह वायरस और ज्यादा ना फैले तथा लोगों को संक्रमित ना करें

धीरे – धीरे कुछ समय बाद वायरस के संक्रमण में कमी आने लगती है तथा अगले कुछ महीनों में वायरस का असर बहुत कम हो जाता है। सभी जगह जन-जीवन सामान्य होने लगता है और लोग जागरूकता के साथ अपने – अपने कामों पर लौटने लगते है।

यह सब देख कर बैक्टीरिया मन ही मन सोचता है ‘मैंने वायरस से कहा था बुराई का नतीजा भी बुरा ही होता है और एक  दिन उसके साथ भी ऐसा ही होगा, अगर सभी लोग स्वच्छता और शुद्धता का पूरा ध्यान रखें तो कभी भी कोई वायरस या बैक्टीरिया उन्हें परेशान नहीं कर सकता चाहे वह कितना ही ताकतवर क्यों ना हो मेरा खुद का फैलना भी तभी संभव है जब लोग स्वच्छता में लापरवाही बरते और अपनी सेहत का ध्यान ना रखें’।

इस कहानी से हमें सीख मिलती है की हम सबको हमेशा सफाई और शुद्धता का पूरा ध्यान रखना चाहिए जिससे की हमारे ऊपर कभी भी किसी तरह के वायरस या बैक्टीरिया का संक्रमण ना फैल पाए।

अगर हम स्वच्छता और शुद्धता की सभी बातों का जागरूक होकर सतर्कता से ध्यान रखेंगे तो हम ना केवल खुद को बल्कि अपने परिवार, दोस्तों के साथ – साथ सारे समाज को भी इनसे फ़ैलने वाली बीमारियों से बचा सकते है।