RhymesLyrics

Categories

The Gingerbread Man

The Gingerbread Man | द जिंजरब्रेड मैन

कहानी 'द जिंजरब्रेड मैन'

एक समय की बात है, शहर में एक बूढ़ी औरत अपने पति के साथ एक बहुत पुराने घर में रहती थी, दोनों आपस में बहुत प्रेम करते थे व अपने सारे काम मिल – बांट कर निपटाते थे।

इन दोनों पति – पत्नी की कोई संतान नहीं थी जिससे उन्हें बहुत अकेलापन महसूस होता था, एक दिन इसी अकेलेपन के समय को बिताने के लिए उस बूढ़ी औरत ने सोचा की कल जिंजर ब्रेड को आकार देकर एक छोटा सा लड़का बनाया जाए

फिर उसने अपने पति को भी बताया कि कल मैं जिंजरब्रेड से जिंजरब्रेड ब्रैडमैन बनाने वाली हंं जिसे सुनकर उसके पति को भी बहुत खुशी हुई और वो भी साथ में मदद कराने के लिए तैयार हो गए।

अगले दिन उन दोनों ने सुबह से ही सारी तैयारियां कर ली, आटा गुंदा व बाकी सब सामग्रियां तैयार कर उन्होंने गुथे हुए आटे को फैला कर मानव आकार का छोटा सा एक बहुत सुंदर जिंजरब्रेड मैन बनाया

उन्होंने जिंजरब्रेड मैन की आँखें किशमिश से बनाई और उसके कोट के बटन को उन्होंने चेरी का इस्तेमाल कर बनाया, वह जिंजरब्रेड मैन देखने में बहुत ही सुंदर लग रहा था। फिर उस जिंजरब्रेड मैन को उन्होंने माइक्रोवेव ऑवन में पकाने के लिए रख दिया और अपने बाकी कामों में लग गए।

कुछ देर बाद जब वह बूढ़ी औरत रसोई में अकेली रह गयी तभी अचानक उसे ऑवन में से एक बच्चे के रोने के जैसी आवाज सुनाई दी जैसे कोई बच्चा अंदर से कह रहा हो ‘मुझे बचाओ, मुझे इसमें से निकालो, मुझे बचाओ, मुझे निकालो’, यह आवाज सुनकर वह थोड़ा घबरा गई।

थोड़ा सा डरते हुए उसने झट से जाकर माइक्रोवेव ऑवन का दरवाजा खोला तो अन्दर का नजारा देखकर वह बिलकुल हैरान रह गई, ऑवन में जो जिंजरब्रेड मैन उन्होंने पकाने के लिए रखा था वह बिलकुल तैयार था। लेकिन यह क्या, वो प्लेट में लेटने की जगह पर खड़ा हुआ था जैसे उसमे जान आ गई थी

बूढ़ी औरत हक्की – बक्की होकर उसे देख ही रही थी कि ऑवन में से वह बहुत ही सुंदर जिंजरब्रेड मैन बाहर निकला और उसने निकलते ही इधर – उधर दौड़ना शुरू कर दिया। रसोई में हर तरफ घूमता हुआ वह जिंजरब्रेड मैन रसोई की खिड़की से देखते ही देखते उधर गार्डन में आ गया

वह औरत भी उसके पीछे – पीछे गार्डन की ओर आई लेकिन उस जिंजरब्रेड मैन ने वहां पर भागना शुरू कर दिया, जब बूढ़ी औरत उसकी ओर बढ़ी तो वह उससे कहने लगा ‘अरे बूढ़ी औरत, तुम मुझे नहीं पकड़ पाओगी, मैं बहुत ही तेज भागता हूं’।

बूढ़ी औरत उसके पीछे – पीछे भागने लगी और उससे कहने लगी ‘अरे रुक जा, रुक जा रे, रुक जा’ पर उसने एक ना सुनी और तेज़ी से आगे भागता चला गया, भागता ही चला गया। कुछ ही पलों में वह काफ़ी आगे निकल चुका था जिससे उस औरत ने उसका पीछा करना छोड़ दिया

कुछ आगे चलकर उस जिंजरब्रेड मैन को एक गाय ने देखा, वह गाय सोचने लगी ‘वाह, बहुत ही स्वादिष्ट ब्रैडमैन लग रहा है। आज तो मैं तुम्हें नहीं जाने दूंगी और मैं तुम्हें खा कर ही रहूंगी’। पर वह जिंजरब्रेड मैन भी कम नहीं था, वह कहने लगा ‘अरे जा तू मुझे नहीं पकड़ पाएगी’ और ऐसा ही हुआ।

वह बड़ी ही आसानी से गाय को चकमा देकर आगे निकल गया। वह जिंजरब्रेड मैन भागता ही जा रहा था, भागता ही जा रहा था कि अचानक उसे रास्ते में एक लोमड़ी मिलीलोमड़ी बहुत ही चालाक थी और अपनी चालाकी से बड़े – बड़े जानवरों को भी मुर्ख बना दिया करती थी।

वह लोमड़ी जब ब्रैडमैन के पीछे भागे जा रही थी तो उससे कह रही थी ‘स्वादिष्ट जिंजरब्रेड मैन रुक जाओ, तुम देखने में बहुत ही स्वादिष्ट लग रहे हो और मेरा तुम्हें खाने को बहुत मन कर रहा है। तुम रुक जाओ, मैं तुम्हें जरूर खाऊंगी’।

लोमड़ी की बात पर जिंजरब्रेड मैन भी आगे – आगे भागता हुआ कह रहा था ‘तुम कोई भी मुझे कभी नहीं पकड़ पाओगे, तुम मुझे कभी नहीं खा पाओगे’, अचानक सामने एक बहुत बड़ी नदी आ गई और जिंजरब्रेड मैन को वहीं पर रुकना पड़ा।

पीछे आ रही लोमड़ी के दिमाग में यह सब देखकर एक चाल सूझी, वह सोचने लगी ‘क्यों न इस जिंजर ब्रैडमैन को चालाकी से खाया जाये क्योंकि यह जिंजर ब्रैडमैन ऐसे तो आसानी से हाथ आने वाला है नहीं’।

यह सोचकर वह चालाक लोमड़ी जिंजरब्रेड मैन से कहने लगी ‘जिंजरब्रेड मैन, मुझे पता चल गया है कि तुम मुझसे बहुत तेज दौड़ते हो और मैंने तुम्हे खाने का इरादा छोड़ दिया है। अगर तुम्हें यह नदी पार करनी है तो तुम मेरी पूंछ पर बैठ जाओ, मैं तुम्हें बड़े ही आराम से नदी पार करा दूंगी’।

ब्रैडमैन ने मन ही मन सोचा ‘अब मेरे पास कोई और उपाय तो है नहीं इस नदी को पार करने का, तो क्यों ना इस लोमड़ी की बात मान ली जाए’ और ऐसा सोच कर वह लोमड़ी की पूंछ पर बिलकुल पीछे की ओर बैठ गया। लोमड़ी उसे लेकर नदी को पार करने के लिए चल दी।

नदी में थोड़ा आगे बढ़ने पर जैसे-जैसे नदी का पानी गहरा हुआ तो लोमड़ी कहने लगी ‘जिंजरब्रेड मैन तुम मेरी कमर पर आ जाओ क्योंकि यहां पर पानी कुछ गहरा है जिससे मेरी पूंछ पाने में डूब सकती है।

जिंजरब्रेड मैन ने भी सोचा ‘हां, पानी तो यहां पर कुछ गहरा लग रहा है अगर मै इस लोमड़ी की पूंछ पर ही बैठा रहा तो फिसलकर नदी में डूब भी सकता हूँ’, तो फिर ब्रैडमैन धीरे-धीरे उसकी कमर पर आ गया

फिर कुछ ओर आगे जाकर लोमड़ी कहने लगी ‘अब तुम मेरे सर पर आ जाओ क्योंकि यहां पर पानी और भी कुछ ज्यादा ही गहरा है’, पानी को बढ़ता देखकर जिंजरब्रेड मैन उसकी बात मान कर उसके सिर पर आकर बैठ गया

धीरे – धीरे लोमड़ी और जिंजरब्रेड मैन नदी को पार करके दूसरे किनारे पर आ पहुचे और नदी से बाहर आ गए, जिंजरब्रेड मैन उस लोमड़ी के सिर पर बैठा बहुत खुश था और सोच रहा था ‘लगता है कि मै इस लोमड़ी से बेकार ही भाग रहा था, इसने मेरी कितनी मदद की है’।

वह अभी खुशी – खुशी लोमड़ी को धन्यवाद करने की सोच ही रहा था कि तभी सही मौका जानकार उस चालाक लोमड़ी ने अचानक से जिंजरब्रेड मैन को बड़ी तेजी से आसमान में उछाल दिया

इससे पहले की अब जिंजरब्रेड मैन खुद को संभाल पाता और यह समझ पाता कि उसे क्या करना है, उस नीचे की और आते ब्रैडमैन को झपटने के लिए लोमड़ी ने अपना मुंह खोल दिया और उस स्वादिष्ट जिंजरब्रेड मैन को अपना भोजन बना लिया